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रविवार, 7 अप्रैल 2024

घर आंगन महका जाना


ओ मेरे नन्हे प्यारे दुलारे,घर आंगन महका जाना।
किलकारी गूंजे आंगन,प्रेम सुमन खिला जाना।।
बहुत आशा हमको तुमसे,सच तुमको हमसे भी।
उसने भेजा जग खातिर सबकी आस पूरा जाना।।

आशीषों का आँचल वारूँ,बहियाँ झूलिया झुलाऊँ।
निश्छल आंखों में तेरी अखियां अपनी  मिलाउँ।।
कुछ पल बचपन जी पाउँ,तेरी अधर मुस्कान में।
मासूम शरारतें देख-देख,खुद को जैसे भुलाऊँ।।

पल पल बदलते ख्वाहिश रंग अनेक दिखायेगा।
नाचेगा अपने साथ-साथ सबको नाच नचायेगा।।
कब से थी तेरी प्रतीक्षा तेरा आगमन हरि इच्छा।
बालहठ अधिकारी तू ,हमें यहाँ-वहाँ दौड़ायेगा।।

जिस लिए आया तू यहाँ,लक्ष्य सहायक बन पाएँ।
सारा आकाश मिले तुझे तेरे यश गायक बन पाएँ।।
पूजा के दीपशिखा हो मन ईश अंश रेयांश तुम।
नवांकुर नव तरु के हम उत्तम पालक बन पाएँ।।

मुस्कान की फसल उगाएँ।।
जिनको पता वही बताएँ,हम क्या खोयें क्या पाएँ।
लीक लकीरों पर चल हारे,अब राह न कोई भटकाएँ।।
चरण चिन्ह देख चलें हैं,अमिट रेख क्या गलत सही है।
तय भी तो है वापस जाना,अब गफलत पल न गवाएँ।।

हवा मुट्ठियों में आएँ न मतलब की रेखा खींच  जाएँ।
कुछ रिश्ते बिन अनुबंधन,पल साथ-साथ चल पाएँ।।
जानी-पहिचानी बस नही है,इतनी तेरी दुनियादारी।
नाम पट्टिका मतलब से हैं,बेमतलब परिचय बनाएँ।।

हाथ सदा मोतियाँ रीतीं,यूँ चलो अनुभव पूंजी लुटाएँ।
तन से धन से कर न सकें,मन संबल हम बन पाएँ।।
तस्वीरों में न साथ सही,तकलीफों में जो साथ
खड़े।
समझौतों का दर्द न पालें,मुस्कान की फसल उगाएँ।।

 

रंगा देतेंव ।।


हाथ होतिस कहूं बेसन सनाय,
           मयारुक के गाल रंगा लेतेंव ।
कइसे लगाही रंग वो मोला,
             गाल मा गाल टेका देतेंव ।।

जेकर संग मन मोर लागय,
         नजर ला थोरिक मिला लेतेंव ।
जेकर बिन मन नइ लागय,
            रंग मा ओकर घोरा जतेंव ।।

ओकर बिन का होरी देवारी,
         गोरी ल गांठी हार पहिरा देतेंव।
उड़ा जातिस जी ओढ़े चुनरी,
           लजकुरहीन ला लजा देतेंव ।।

बात-बात मा ताना मरईया के,
               होरी मा अबड़ मजा लेतेंव।
रंग सिन्दूरी माथ लगाके ,
          गोरी नखरेली ला सजा देतेंव।।

रंग कभू झन होय पटपटहा,
               गोरी संग होरी मना लेतेंव ।
किसन बंसुरिया रधिया पैरी जस,
       ओकर नांव ल फगुवा गा लेतेंव।।

            रोशन साहू ( मोखला )
                 7999840942

रविवार, 26 नवंबर 2023

क्या जानों तुम ऒ यारा

 

क्या जानों तुम ऒ यारा ,
तुम बिन कैसे बीती है l
दिन तड़पता है आँखों में ,
रात अकेले रोती है l (1)
एक ही है, दर्द हमारा,
प्यार तुम्हारा पा लूँ मैं l
टूट रहें बेचैन के बादल,
आँसू कहाँ छुपा लूँ मैं ll (2)
हर दिवस में छाया बन,
मेरे पीछे लग जाते हो l
रात अकेली तन्हाई में ,
हमको बहुत सताते हो ll (3)
कल अतीत में खोया था,
आज भविष्य में खो गया हूँ l
कल आँसू बनकर उमड़ा था,
आज बादल बन बरस रहा हूँ ll (4)
हमनें अपने खाली हाथों से,
उम्मीदी आँसू पोछे है l
क्या मालूम राहों में " परिंदा ",
उम्मीद से बढ़कर धोखें है ll (5)
संग्रह -- परिंदा : (कविता - गज़ल ) संग्रह से l
रचनाकार --- मुकेश सिंह "परिंदा "
चुनार , मिर्ज़ापुर , ( यू. पी.)

शनिवार, 25 नवंबर 2023

क्या करूँ ! जो राह में भी बस तुम्हारी

 

Gudiyaa Raajeev Ranjan

क्या करूँ ! जो राह में भी बस तुम्हारी याद थी

क्या हुआ! तुमने अगर सारी उदासी बाँध दी
क्या करूँ! हर पल तुम्हारी गन्ध मेरे साथ थी
क्या हुआ! जो दर्प की खारी हँसी थी सालती
क्या करूँ ! जो आँख सुधि की बन्द हो पाती नही
क्या हुआ! फिर जो तुम्हारे साथ मेरी बेबसी
क्या करूँ ! जो फिर तुम्हारा साथ मिलता ही नही
क्या हुआ! मैने छिपा ली आज आँखों की नमी
क्या करूँ ! जो हर कथा नाकामियों का ढेर थी
क्या हुआ! जो स्वर तुम्हारे फिर कभी गूँजे नहीं
क्या करूँ ! विश्वास के जादूगरी की नीद थी
क्या हुआ ! जो स्वप्न करता ही रहा जादूगरी
क्या करूँ ! जो रिक्तता की बात तुमने छेड़ दी
क्या हुआ! जो बात मेरी लौट आती बावरी
क्या करूँ ! अनुगूँज का जो मुझे है टेरती
क्या हुआ! जो कालिमा नेपथ्य की गहरा गई

सोमवार, 26 जून 2023

सावन लेकर आना गीत

  बलविंदर बालम गुरदासपुर

सावन लेकर आना गीत मुहोब्बत के।
झोली भर ले जाना गीत मुहोब्बत के।
बारिश के आभूषण में हरियाली हो।
सूखेपन के भीतर भी खुशहाली हो।
मौसम को समझाना गीत मुहोब्बत के।     
सावन लेकर आना गीत मुहोब्बत के।
खुशबूदार हवाओं के संदेश मिले।
हर बगिया के भीतर सुंदर फूल खिले।
लय के साथ सुनाना गीत मुहोब्बत के
सावन लेकर आना गीत मुहोब्बत के।
सौंदर्य लेना इन्द्रधनुष की डाली से।
आत्मतुष्टि पाना त्रैकालिक के माली से।
प्रगतिशील चुराना गीत मुहोब्बत के।
सावन लेकर आना गीत मुहोब्बत के।
झूले तीज त्यौहार उमंग उल्लास।
खिलता जाए भाईचारे में विश्वास।
घर घर में पहुंचाना गीत मुहोब्बत के।
सावन लेकर आना गीत मुहोब्बत के।
धर्मद्वारे  शिव की पूजा होती है।
बालम, पूर्ण इच्छा फूल पिरोती है।
रस्मों का नज़राना गीत मुहोब्बत के।
सावन लेकर आना गीत मुहोब्बत के। 
,ओंकार नगर गुरदासपुर पंजाब  
मेसंजर +919815625409, कनेडा

रविवार, 5 मार्च 2023

होली का त्‍योहार

गीत (होली पर विशेष)

सर्वलौकिक क्षितिज के नीचे प्रतिबद्धप्यार।

ढोलक ढोल मंजीरे पायल होली का त्योहार। 

फाग फबीला लेकर आया घर-घर में परिहास।

फूलों की खश्बू में बिखरा है हर्षोल्लास।

ढोलक ढोल मंजीरे पायल होली का त्योहार।

आज़ादी, सौंदर्य मुहोब्बत की संज्ञा है होली।

नील गगन तक छू जाती है इस दिन यह रंगोली।

भारत के माथे तिलक लगाए सांझ का सभ्याचार।

ढोलक ढोल मंजीरे पायल होली का त्योहार।

भिन्न-भिन्न रंगों की आभा में दिखती है परिभाषा।

नाच रही है हृदय में स्वर्ग लोग की आशा।

सुन्दर मौसम के रंगों में पाया है इकरार।

ढोलक ढोल मंजीरे पायल होली का त्योहार।

भाईचारे के आँगन में मानवता की ज्योति।

भारत के इतिहास में है यह एक पुरानी रीति।

नाच रहा है खुशियां लेकर यह सारा संसार।

ढोलक ढोल मंजीरे पायल होली का त्योहार।

बच्चे-बूढ़े नर और नारी रंगों में उत्तीर्ण।

प्रोत्साहन की प्राकृति में, नहीं कोई संकीर्ण।

दिल के दरिया में बहते हैं घर-घर में संस्कार।

ढोलक ढोल मंजीरे पायल होली का त्योहार।

अम्बर को भी छू गई गिद्धे-भंगड़े की पराकाष्ठा।

तन मन रूह में ओजस्वी बिखर गई है नम्रता।

मदहोश हुआ है साजन की बाहों में दिलदार।

ढोलक ढोल मंजीरे पायल होली का त्योहार।

इस दिन रिश्तों के फूलों की सुरभियां बढ़ जाती।

हर एक दिल में ही खुशहाली की फसलें लहराती।

ग़ैर बिगाने साजन मिलते, मिट जाते तकरार।

ढोलक ढोल मंजीरे पायल होली का त्योहार।

रंग बिरंगी दस्तारें हैं जैसे टिम-टिम तारे।

स्वरूप् इलाही गुरू के बच्चे दबंग प्यारे-प्यारे।

जन्नत की आभा मण्डल आनंदपुर का दरबार।

ढोलक ढोल मंजीरे पायल होली का त्योहार।

बालमगुलशन के आँगन में फूलों के सबरंग।

सब धर्मों के मेले सब धर्मों के संग।

भारत की उत्तमोतमता में यह शुचिता श्रृंगार।

ढोलक ढोल मंजीरे पायल होली का त्योहार।

बलविन्दर बालमगुरदासपुर

ओंकार नगर, गुरदासपुर (पंजाब)

मो. 9815625409