राष्ट्रभाषा हैं हिन्दी
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हिन्दी मेरा परिचय हैं
हिन्दी मेरा शब्दालय हैं ।
मुझको रखती चैतन्य
हिन्दी गंगा-हिमालय हैं ।
हिन्दी मेरा विद्यालय हैं
हिन्दी मेरा पुस्तकालय हैं ।
पारस - मोती जैसे शब्द
हिन्दी मेरा देवालय हैं ।।
हिन्दी में हीं माँ बोला हैं
हिन्दी बचपन का झूला हैं ।
जीवन का ऊर्जावान दीप
हिन्दी ही काशी - मथुरा हैं ।।
हिन्दी का हर शब्द प्यारा हैं
हिन्दी का इतिहास न्यारा हैं ।
संत कबीर की अमृतवाणी
हिन्दी भाषा अमृतधारा है ।।
हिन्दी भाईचारे की भाषा हैं
हिन्दी सबकी अभिलाषा हैं ।
रसखान,रहीम की साधना
हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा हैं ।।
*हिंदी जन-जन की है भाषा*
एकता और बढ़ाती भाईचारा
सभी से रखती प्रेम का नाता ।
भेदभाव से जो हैं कोसों दूर
हिन्दी जन - जन की हैं भाषा ।।
अपनी पहचान है हिन्दी से
विश्व मंच पर शान इसी से ।
राष्ट्र संघ की भी जिज्ञासा
हिन्दी जन-जन की हैं भाषा ।।
मॉरिशस ,फिजी , थाईलैंड में
हिन्दी का ही है बोलबाला ।
विश्व भाषा बनें हिंदी भाषा
हिन्दी जन - जन की हैं भाषा ।।
ऊर्जा,ओज,उजास यही है
भारत माँ की है आत्मा ।
हिन्दी अमृत मिटे पिपासा
हिन्दी जन-जन की हैं भाषा ॥
हिन्दी शीर्ष सुमन है विश्व में
नमन करे कवि-लेखक गण ।
माँ भारती की यह शान हैं
हिन्दी जन-जन की हैं भाषा ।।
इसमें तुलसी के राम रमें
इसमें मीरा के कृष्ण जमें ।
इसकी लिपि के सब है दासा
हिन्दी जन - जन की हैं भाषा ॥
महू -नीमच राजमार्ग नागदा (धार) म.प्र.
99814-67300

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