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शनिवार, 18 सितंबर 2021

दो कविताएं - गोपाल कौशल " भोजवाल "


 
राष्ट्रभाषा हैं हिन्दी

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हिन्दी  मेरा  परिचय  हैं
हिन्दी मेरा शब्दालय हैं ।
मुझको  रखती चैतन्य
हिन्दी गंगा-हिमालय हैं ।

हिन्दी  मेरा  विद्यालय  हैं
हिन्दी मेरा पुस्तकालय हैं ।
पारस - मोती  जैसे शब्द
हिन्दी   मेरा  देवालय  हैं  ।।

हिन्दी  में  हीं  माँ  बोला  हैं
हिन्दी  बचपन का  झूला हैं ।
जीवन  का  ऊर्जावान दीप
हिन्दी ही  काशी - मथुरा हैं ।।

हिन्दी का हर शब्द प्यारा हैं
हिन्दी का इतिहास न्यारा हैं ।
संत कबीर  की अमृतवाणी
हिन्दी  भाषा  अमृतधारा है ।।

हिन्दी भाईचारे की भाषा हैं
हिन्दी सबकी अभिलाषा हैं ।
रसखान,रहीम  की साधना
हिन्दी  हमारी  राष्ट्रभाषा हैं ।।




 *हिंदी जन-जन की है भाषा* 

एकता और बढ़ाती भाईचारा
सभी से रखती प्रेम का नाता ।
भेदभाव  से जो  हैं कोसों दूर
हिन्दी जन - जन की हैं भाषा ।।

अपनी पहचान है हिन्दी से 
विश्व मंच पर  शान इसी से ।
राष्ट्र संघ  की भी  जिज्ञासा 
हिन्दी जन-जन की हैं भाषा ।।

मॉरिशस ,फिजी , थाईलैंड में 
हिन्दी  का  ही  है  बोलबाला ।
विश्व  भाषा  बनें  हिंदी भाषा
हिन्दी जन - जन की हैं भाषा ।।

ऊर्जा,ओज,उजास यही है 
भारत  माँ  की  है  आत्मा ।
हिन्दी अमृत मिटे पिपासा
हिन्दी जन-जन की हैं भाषा ॥ 

हिन्दी शीर्ष सुमन है विश्व में 
नमन करे कवि-लेखक गण ।
माँ भारती की  यह  शान हैं
हिन्दी जन-जन की हैं भाषा ।। 

इसमें  तुलसी  के  राम रमें 
इसमें  मीरा के  कृष्ण जमें ।
इसकी लिपि के सब है दासा
हिन्दी जन - जन की हैं भाषा ॥


महू -नीमच राजमार्ग नागदा (धार) म.प्र.

  99814-67300

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